HIDE
GRID_STYLE
6
Latest
{fbt_classic_header}

लोकप्रिय पोस्ट

Nastik Ki Prarthana - [Book]

Nastik Ki Prarthana मशहूर लेखक मानव कौल का कविता-संग्रह है। इस संग्रह में उनकी लिखी 55 कविताएँ हैं जो अकेलापन, यादें, अपनी पहचान और मन के भ...

nastik-ki-prarthana

Nastik Ki Prarthana मशहूर लेखक मानव कौल का कविता-संग्रह है। इस संग्रह में उनकी लिखी 55 कविताएँ हैं जो अकेलापन, यादें, अपनी पहचान और मन के भीतर चलने वाला विचार और भावनाओं के टकराव जैसे विषयों को सामने लाती हैं।
A collection of poems inspired by life, nature and the soul.

Nastik-Ki-Prarthana
मानव कौल ने अपनी रचनात्मक यात्रा की शुरुआत कविताओं से की थी। फिर नाटक, कहानियाँ और उपन्यास लिखते-लिखते वे अपनी ही भाषा से जैसे कुछ दूर चले गए। भीतर एक भूख बनी रही, घर लौटने की, अपनी पहली आवाज़ तक पहुँचने की। उनके लिए यह घर कविताएँ थीं।

Manav Kaul इसे कई सालों तक उपन्यास, नाटक और लघु कथाओं पर ध्यान देने के बाद कविता की दुनिया में वापसी— यानी एक तरह से अपनी रचनात्मक जड़ों की ओर लौटना— बताते हैं। ये कविताएँ प्यार, अकेलेपन, आध्यात्मिकता, बिना धर्म वाली आध्यात्मिकता, समाज में कला की जगह और इंसानियत से जुड़े गहरे सवालों पर बात करती हैं।

एक उपन्यास पर काम करते हुए जब उसका अंत एक कविता में खुला, तब उन्हें लगा कि वे फिर अपने घर के आसपास हैं, उसकी गलियों, आँगन और गंध के पास। उसी क्षण से कविताएँ लौटने लगीं। यह संग्रह उसी लौटने की यात्रा है।

पढ़ने वालों का कहना है कि यह एक ऐसी किताब है जो सोचने-समझने और आत्म-मंथन करने पर मजबूर करती है। यह कविता के ज़रिए पाठकों को निजी और डायरी जैसी बातचीत में शामिल करती है। कई लोगों को लगता है कि ये कविताएँ उनके अपने अनुभवों और भावनाओं से गहराई से जुड़ती हैं।

‘नास्तिक की प्रार्थना’ उन कविताओं की किताब है, जो ‘कुछ कहना छूट गया है’ की टीस और भूख से निकली हैं। इसमें आत्मीयता है, बेचैनी है, स्मृति है और वह स्वाद है, जो लंबे समय बाद घर के खाने में मिलता है।

यह संग्रह पाठक को भी अपने भीतर के किसी पुराने, भूले हुए घर तक ले जा सकता है।

  • 'Nastik Ki Prarthana' को 4 मई 2026 को हिंद युग्म ने प्रकाशित किया था। यह 136 पन्नों की कविता संग्रह का पहला संस्करण है।
  • 'नास्तिक की प्रार्थना' में अलग-अलग लंबाई की 55 कविताएँ हैं।

इस किताब के बारे में मीनाक्षी जोशी जो उत्तराखंड से हैं। अपने इंस्टाग्राम हैण्डल पर लिखती हैं - 

"सच कहूं, तो किसी का आस्तिक या नास्तिक होना मुझे कभी विचलित नहीं करता, ये किसी का व्यक्तिगत मत है और मैं इस बात का सम्मान करती हूं पर जो एक चीज मुझे हमेशा परेशान करती है वो है आस्तिक और नास्तिक की इस दौड़ में हारती हुई "मानवता"🌻

"हम धीरे-धीरे मनुष्य होना भूल रहे है, जो चौंकाने से ज्यादा मेरे लिए डरावना है। प्रार्थना चाहे कोई नास्तिक करें या आस्तिक पर वो तभी स्वीकार्य होगी जब करने वाले के मन में, ईश्वर से पहले एक मनुष्य बसता हो, प्रेम और अपनेपन से भरा हुआ। क्यूंकि इस दुनिया को यदि कुछ बचा सकता है तो वह प्रेम और करुणा ही है।"

"इस किताब को लेने के पीछे दो कारण थे, लंबे समय बाद @manavkaul19 जी की कविताओं को पढ़ना और दूसरा इसका नाम और किताब को पढ़ने के बाद दोनों ही कारण सार्थक लग रहे।"

"मेरे लिए कविताओं की प्रस्तुति से ज्यादा हमेशा कविता का विषय मायने रखता है क्यूंकि वो लेखक की नियत और विचारों के समागम को दिखाता है। किताब में जिन अलग-अलग विषय पर कविताएं लिखी गयी है वो मुझे व्यक्तिगत रूप से पसंद आयी।"

Comments

Leave a comment
Loading Facebook comments...
Loading Disqus comments...